यह देश सनातन धर्म का है
यह देश हैं हिन्दूत्वं समर्पण का
यह भूमि राम-राज्य शिखरों पर
यह धरा धर्म-निरपेक्ष से खिली हैं।
यह देश सनातन श्वासों का देश है
जहाँ समय भी नमन करता है मूल्यों के चरणों में,
जहाँ आस्था कोई दीवार नहीं
बल्कि संवाद है—पीढ़ियों के बीच।
यह देश हिन्दुत्व के समर्पण का देश है
अहंकार नहीं, करुणा का अभ्यास,
दीप जलते हैं स्वयं के लिए नहीं
दूसरों के अँधेरों को पहचानकर।
यह भूमि राम-राज्य की कल्पना से ऊँची है
जहाँ सिंहासन से पहले उत्तरदायित्व आता है,
जहाँ शक्ति का अर्थ संयम है
और न्याय का अर्थ करुणा।
यह धरा धर्म-निरपेक्ष होकर भी पुष्पित है
क्योंकि यहाँ हर विश्वास को
मिट्टी की तरह समान जल मिलता है,
और हर प्रार्थना
आकाश में अपनी जगह पाती है।
यह देश केवल नक़्शे पर नहीं,
संस्कारों में बसता है—
जहाँ परंपरा प्रश्नों से डरती नहीं
और भविष्य जड़ों से कटता नहीं।
यह देश सनातन चेतना का उजास है
जहाँ युग बदलते हैं, मूल नहीं बदलता,
जहाँ आस्था प्रश्नों से संवाद करती है,
और संस्कृति समय के साथ चलना जानती है।
यह देश हिन्दूत्व के समर्पण की साधना है
जहाँ शक्ति में विनम्रता का वास है,
जहाँ सेवा ही सबसे बड़ा यज्ञ है,
और करुणा सबसे ऊँचा धर्म।
यह भूमि राम-राज्य के आदर्शों से अनुप्राणित है
और धर्म-निरपेक्षता इसकी आत्मा का विस्तार,
जहाँ हर पंथ को सम्मान की धूप मिलती है,
और भारत मानवता का साझा परिवार बनता है।
यही भारत है—संस्कारों से गढ़ा हुआ भविष्य,
जहाँ आस्था और विवेक साथ-साथ चलते हैं,
जहाँ विविध स्वर एक राग बन जाते हैं,
और मानवता ही अंततः विजय कहलाती है।
Comments
Post a Comment